3 कारण जिनकी वजह से भारत हार सकता है विश्वकप 2019 का फाइनल मैच

3 कारण जिनकी वजह से भारत हार सकता है विश्वकप 2019 का फाइनल मैच

विश्वकप 2019 31 मई से इंग्लैंड में शुरू होने जा रहा है और इस बार भारत को विश्व कप का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। जहाँ एक तरफ भारतिय स्पिनर , और शीर्ष तीन बल्लेबाज भारत का मजबूत पक्ष माना जा रहा है , वहीं कुछ कमजोरियां भी है इस टीम में जो भारत के मिशन विश्वकप में रोकथाम लगा सकता है, आइये एक नजर डालते हैं भारत के उन कमजोरियों पर जिनके कारण भारत विश्व कप हार सकता है।



1. अनुभवहीन मध्यक्रम


भारत के शीर्ष तीन बल्लेबाज यानी रोहित शर्मा, शिखर धवन और विराट कोहली भारत का सबसे मजबूत पक्ष हैं, और इनके दम फर ही भारत मुख्यतः मैच जीतता आया है परन्तु जब भी भारत का टाप आर्डर फेल होता है , अनुभवहीन मध्यक्रम की वजह से टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर जाती है, विश्वकप 2015 से अब तक भारत ने 9 बल्लेबाजों को नंबर चार पर खेलाया है परंतु कोई भी सफल नहीं हुआ, रायुडू ने जरूर पिछले कुछ समय में अच्छा प्रदर्शन किया है पर अनुभवहीनता उनमें भी नजर आती है।




2. दमदार फिनिशर की कमी


महेंद्र सिंह धोनी ने आस्ट्रेलिया में अच्छा प्रदर्शन किया पर वह उस गति से रन बनाने में अब सक्षम नहीं रहे जैसे पहले हुआ करते थे और यही वजह है कि वह एक मध्यक्रम बल्लेबाज के तौर पर ज्यादा और एक फिनिशर के रूप में कम खेलते हैं, और उनके द्वारा रिक्त किये गए इस स्थान को कोई और बल्लेबाज नहीं निभा पा रहा , दिनेश कार्तिक , हार्दिक पांड्या और केदार जाधव ने टुकड़ों में अच्छा प्रदर्शन किया है पर इनमें से कोई भी विश्वशनीय फिनिशर नहीं बन पाये हैं और इस वजह से टीम आखिरी ओवरों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता जो कि भारत के लिए एक चिंता का विषय है।




3. भुवनेश्वर कुमार का खराब फार्म


भारत के तेज गेंदबाज अब विश्वस्तरीय नजर आते हैं, शमी, इशांत और खासकर बुमराह ने काफी शानदार प्रदर्शन किया है. भारत के लिए जो बात चिंताजनक है वह है भारत के स्ट्राइक गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार का हालिया फार्म। गौरतलब है कि भुवी भारत के लिए पिछले कुछ वर्षों से लगातार नये गेंद और डेथ ओवरों में मुख्य गेंदबाज के तौर पर गेंदबाजी करते आये हैं पर उनका हालिया फार्म कुछ खास अच्छा नहीं रहा है, न ही वह नयी गेंद से विकटें ले पा रहे हैं और न ही डेथ ओवरों में रन रोक पा रहे हैं , भारत की गेंदबाजी बहुत हद तक भुवनेश्वर पर निर्भर करती है और इसलिए अगर भारत विश्व कप जीतना चाहता है तो जरूरी है कि भुवनेश्वर अच्छा प्रदर्शन करें।

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एबी डिविलियर्स ने किया खुलासा इस मुसीबत के चलते मात्र 34 वर्ष की आयु में क्रिकेट से लिया था संन्यास

AB de Villiers Retirement-दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तूफानी बल्लेबाज और कप्तान एबी डीविलियर्स जिन्होंने 23 मार्च 2018 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। बता दें कि डिविलियर्स जिन्होंने यह फैसला आईपीएल के बाद अचानक लिया जिसके बारे में किसी को उम्मीद नहीं थी। उन्होंने अपना कारण भी जरूर बताया था कि उन्होंने किस कारण क्रिकेट को अलविदा कहा है। लेकिन अब लोगों के मन में यह सवाल है कि डिविलियर्स जो इतने बड़े खिलाड़ी थे और शानदार प्रदर्शन भी कर रहे थे लेकिन सिर्फ 34 वर्ष की आयु में ही क्रिकेटर क्यों छोड़ दी जबकि सचिन 39 साल तक क्रिकेट खेले थे।


जानिये एबी डिविलियर्स ने क्यों लिया था 34 वर्ष की आयु में संन्यास



दरअसल आपको बता दें कि 34 वर्षीय तूफानी विकेटकीपर बल्लेबाज एबी डिविलियर्स जो अपने करियर में 114 टेस्ट, 228 वनडे और 71 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले थे इस कारण वो थक गए। जी हां, उन्होंने यह बात जब संन्यास लिया तब वीडियो शेयर करके बताई थी। इस कारण उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कहा। जबकि अगर सचिन तेंदुलकर की बात करें तो तेंदुलकर ने अपनी उम्र के हिसाब से क्रिकेट को अलविदा कहा था। तेंदुलकर आज दुनिया के सबसे महान बल्लेबाजों की सूची में पहले स्थान पर आते हैं जिनके नाम वनडे और टेस्ट में सबसे अधिक रन, सबसे अधिक मैच और सबसे अधिक शतक हैं।




संन्यास लेते वक्त यह थे एबी डिविलियर्स के बोल


"114 टेस्ट मैच, 228 वनडे और 78 टी-20 खेलने के बाद यह समय है कि दूसरों को मौका मिले। ईमानदारी से कहूं तो मैं थक चुका हूं। यह मुश्किल फैसला था। मैंने इसके बारे में काफी कुछ सोचा। हमने भारत और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार सीरीज जीतीं और अब मुझे लगता है कि यह संन्यास लेने का सही समय है।"  इसके बाद आगे कहा, "14 सीजन पहले एक युवा खिलाड़ी के तौर पर मैंने दक्षिण अफ्रीकी टीम में कदम रखा था। आज उसी जगह से मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि मैंने तुरंत प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला ले लिया है।”


पूर्व क्रिकेटर एबी डिविलियर्स के अंतरराष्ट्रीय करियर पर एक नजर डालें तो इन्होंने टेस्ट में 8765, वनडे में 9577 और टी-20 में 1672 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने कुल 47 शानदार शतक बनाए थे। लेकिन अब वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फिर कभी नजर नहीं आएंगे।


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बड़ी वजह आई सामने, इसलिए 2019 विश्वकप में कोहली की जगह धोनी को बना देना चाहिए टीम इण्डिया का कप्तान

जैसे-जैसे आईसीसी क्रिकेट विश्वकप 2019 नजदीक आ रहा है लोगों में क्रेज और बढ़ रहा है. साथ ही भारतीय टीम भी लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूती और बढ़ा रही है. बता दें कि टीम इंडिया के वर्तमान कप्तान विराट कोहली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं और चौथे टेस्ट में काफी जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है. पहली पारी में 622 रनों के जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पारी 300 रन बनाकर सिमट गई और अभी फॉल ऑन कर रही है.


2019 का विश्व कप बेहद नजदीक है पहला मुकाबला 30 मई को इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच होगा. वहीं भारत का पहला मैच 5 जून को अफ्रीका के साथ ही खेला जाने वाला है. अब लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या महेंद्र सिंह धोनी को 2019 के विश्व कप में एक बार फिर से कप्तानी देनी चाहिए या नहीं. तो आज हम इसी सवाल के जवाब में आपको विस्तार से बताएंगे.



क्या धोनी को एक बार फिर सौंप देनी चाहिए 2019 के विश्वकप में कप्तानी?


जैसा कि आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी आज किसी भी प्रारूप में भारतीय टीम के कप्तान नहीं है. वर्तमान समय में विराट कोहली टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे हैं और काफी शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को नई-नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं. वनडे रैंकिंग में आज भारत दूसरे स्थान पर हैं तो टेस्ट में पहले पायदान पर और टी-20 की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर बनी हुई है. इन सब में विराट कोहली का सबसे बड़ा हाथ है इस कारण हम यही कहेंगे कि महेंद्र सिंह धोनी को 2019 के विश्व कप में कप्तान बनाना सही फैसला होगा क्योंकि विराट आज एक शानदार कप्तान के अलावा बल्लेबाज भी हैं और लगातार टीम इंडिया को जीत दिलाते आ रहे हैं.


इस कारण विराट कोहली ही कप्तान बेहतर रह सकते हैं. विराट आज दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाज बनकर उभरे है और सचिन के रिकॉर्ड लगातार तोड़ते आ रहे है.



साथ ही आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों काफी खराब फॉर्म में चल रहे हैं. लेकिन सभी को उम्मीद यही है कि वह आगामी विश्व कप में जगह बनाकर अच्छा खेलेंगे और अपने लंबे करियर का समापन करेंगे. 2011 के विश्व कप में धोनी ने अपनी कप्तानी में छक्के की मदद से फाइनल मैच में भारत को जीताया था.

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दोस्तों क्या आप जानते हैं कि अगर धोनी 2003 विश्वकप टीम इण्डिया के लिए खेलते तो टीम इण्डिया विश्वकप जीत सकती थी

( India Could Have Won 2003 World Cup If MS Dhoni Was There )- धोनी 2003- साल 2003 का क्रिकेट विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे तथा केन्या में आयोजित किया गया था जिसमें ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को फाइनल में शिकस्त दी थी. उस समय भारतीय टीम की कप्तानी सौरव गांगुली के हाथों में थी जिन्होंने बखूबी निभाई लेकिन फाइनल नहीं जीत पाये थे.


अब लोगों का यह कहना है कि क्या धोनी अगर वो विश्व कप खेलते तो क्या भारत जीत सकता था. इस सवाल में हमने जो जवाब दिया है वो आप खुद नीचे देख सकते है.




धोनी अगर खेलते तो क्या भारत जीत सकता था 2003 का विश्व कप |India Could Have Won 2003 World Cup


जानकारी के लिए आपको बता दें कि एमएस धोनी जिन्होंने साल 2004 में भारतीय क्रिकेट टीम में कदम रखा था और जब यह टूर्नामेंट खेला जा रहा था उस समय माही का घरेलू सर्किट में कुछ ऐसा ख़ास प्रदर्शन नहीं था और साथ ही उस समय टीम इंडिया में विकेटकीपर के रूप में राहुल द्रविड़ सबसे उपयुक्त थे.



अगर हम याद करें तो, उस विश्वकप में भारतीय टीम ने काफी शानदार प्रदर्शन किया था और महज दो मैचों को जीत नहीं पाया था और यह दोनों मुकाबले ऑस्ट्रेलिया से हारे थे. फाइनल मुकाबले में भारत 7 बल्लेबाजों के साथ खेला था और हर एक अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन जीत नहीं सका था. अगर हम गेंदबाजों की बात करें तो दक्षिण अफ्रीकी परिस्थितियों में पेसर तिकड़ी (श्रीनाथ, जहीर और नेहरा) थे. सचिन और सहवाग के साथ-साथ पार्ट टाइमर्स के रूप में हरभजन स्पिन मुख्य स्पिनर थे. पूरे टूर्नामेन्ट में भारत का जलवा था. सचिन तेंदुलकर सबसे ज्यादा 673 रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे.

लेकिन हमारा यह मानना है कि अगर धोनी उस विश्व कप में खेलते तो शायद ही कोई फर्क पड़ता. दरअसल बात यह है कि टीम इंडिया मैनेजमेंट किसी अनुभवी को बाहर करके ऐसे बड़े टूर्नामेंट में युवा को मौका भी नहीं देना चाहती. अगर दे भी देती तो घरेलू मैदानों से एकदम धोनी अच्छा प्रदर्शन शायद ही कर पाते क्योंकि हमने देखा है कि अब तक भी माही का बल्ला एशिया में ही अच्छा चलता है.


विश्वकप 2003 उस समय के कप्तान सौरव  गांगुली का ब्यान देखिये 

खुद उस टीम के कप्तान सौरव गांगुली ने यह बात एक कार्यक्रम में स्वीकार की थी कि हाँ अगर धोनी टीम में होते तो टीम इण्डिया विश्वकप फाइनल मैच जीत सकती  थी. धोनी होते तो टीम इण्डिया की बल्लेबाजी में ऊपरी क्रम में तूफानी बल्लेबाज टीम के पास होता।

इस तरह इस फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया से 125 रनों के अंतर से हारना पड़ा था. लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी कप्तानी में 2011 में खेले गए विश्व कप में 28 सालों बाद खिताब जितवाया था. इससे पूर्व 2007 के टी-20 विश्व कप में भी ट्रॉफी उठाई थी.

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