सुरेश रैना को गन्दी बीमारी- इसको कर दिया रैना ने खुद से दूर तो बना देंगे फाइनल में देखना पक्का 30 गेंद पर धमाकेदार 100 रन वाला शतक

सुरेश रैना को गन्दी बीमारी- इसको कर दिया रैना ने खुद से दूर तो बना देंगे फाइनल में देखना पक्का 30 गेंद पर धमाकेदार 100 रन वाला शतक

Suresh Raina Batting- भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच में चल रही टी20 सीरीज अब इस बार पहले से ज्यादा रोमांचक हो गयी है. अब सीरीज 1 और 1 की बराबरी पर आ गई है. शुरू में ऐसा लग रहा था कि जैसे इंडियन टीम बड़ी आसानी से ट्वेंटी-20 सीरीज को भी जीत लेगी. लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने एक शानदार पलटवार करके यह दिखा दिया है कि दक्षिण अफ्रीका अभी भी ट्वेंटी 20 के फॉर्मेट में इतनी कमजोर टीम नहीं है कि भारत उसको इतनी आसानी से हरा देगा.

दक्षिण अफ्रीका के पास इस समय क्लासेन जैसा एक शानदार खिलाड़ी है जो मात्र 2 से 3 ओवर में ही पूरा मैच पलट सकता है. दूसरे ट्वेंटी-20 मैच में क्लासेन ने ही जैसे की मैच दक्षिण अफ्रीका की झोली में डाल दिया था. जब यह बल्लेबाज आउट हुआ तो तब तक तो मैच का कि जैसे कि पलट गया था. इन्डियन टीम के पास रैना जैसा शानदार खिलाड़ी मौजूद है लेकिन रैना शानदार शुरुआत को ज्यादा अच्छा बना नहीं पा रहे हैं. तो आइये आपको हम सुरेश रैना की एक ऐसी बीमारी के बारें में बताते हैं जो रैना को अभी भी परेशान कर रही है- Suresh Raina Batting


Suresh Raina Batting

दूसरे ट्वेंटी-20 मैच में सुरेश रैना की बात करें तो वह भी अच्छा रन बनाते हुए नजर आए थे. रैना अभी तक दोनों नहीं मैच में अच्छा रन बनाते हुए दिखे तो जरूर है लेकिन उस अच्छी शुरुआत को यह बल्लेबाज अभी तक बड़े स्कोर में कन्वर्ट नहीं कर पाए हैं.


Suresh Raina Batting





रैना शायद से बात जानते होंगे कि वह दोनों मैच में किस तरह की गलती करके आउट हुए हैं. आपको बता दें कि सुरेश रैना गेंद के आने से पहले ही दो से तीन कदम आगे निकल आते हैं. छोटे-छोटे से कदम जब रैना विकेट के सामने लाते हैं तो वह गेंदबाज के गेंद डालने से पहले ही विकेट्स के सामने आ जाते हैं. तब विपक्षी गेंदबाज या तो उनके पैरों पर वार करता है या फिर गेंद को सीधा विकेट्स पर देता है क्योंकि रैना के दोनों कदम इस समय विकेट के सामने होते हैं.

Suresh Raina Batting


ऐसा नहीं है कि सुरेश रैना इस गलती को पहली बार दोहरा रहे हैं. इससे पहले भी टीम से आउट होने से पहले आपको याद हो तो रैना इसी तरह से बार-बार यही गलती कर रहे थे. जब रैना विकेट के सामने होते हैं और गेंद मिस करते हैं तो उनके एलबीडबल्यू की संभावना ज्यादा होती हैं.

विपक्षी टीम के गेंदबाज सुरेश रैना को उनके पैरों के पीछे से बोल्ड आउट भी पहले ज्यादा करने लगे थे. अभी अगर रैना अपनी इस गलती पर काम कर लें तो निश्चित रूप से इनके अंदर अभी इतना सारा क्रिकेट है कि   वह 20 गेंद पर अर्द्धशतक तो लगा ही सकते हैं.

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बड़ी वजह आई सामने, इसलिए 2019 विश्वकप में कोहली की जगह धोनी को बना देना चाहिए टीम इण्डिया का कप्तान

जैसे-जैसे आईसीसी क्रिकेट विश्वकप 2019 नजदीक आ रहा है लोगों में क्रेज और बढ़ रहा है. साथ ही भारतीय टीम भी लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूती और बढ़ा रही है. बता दें कि टीम इंडिया के वर्तमान कप्तान विराट कोहली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं और चौथे टेस्ट में काफी जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है. पहली पारी में 622 रनों के जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पारी 300 रन बनाकर सिमट गई और अभी फॉल ऑन कर रही है.


2019 का विश्व कप बेहद नजदीक है पहला मुकाबला 30 मई को इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच होगा. वहीं भारत का पहला मैच 5 जून को अफ्रीका के साथ ही खेला जाने वाला है. अब लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या महेंद्र सिंह धोनी को 2019 के विश्व कप में एक बार फिर से कप्तानी देनी चाहिए या नहीं. तो आज हम इसी सवाल के जवाब में आपको विस्तार से बताएंगे.



क्या धोनी को एक बार फिर सौंप देनी चाहिए 2019 के विश्वकप में कप्तानी?


जैसा कि आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी आज किसी भी प्रारूप में भारतीय टीम के कप्तान नहीं है. वर्तमान समय में विराट कोहली टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे हैं और काफी शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को नई-नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं. वनडे रैंकिंग में आज भारत दूसरे स्थान पर हैं तो टेस्ट में पहले पायदान पर और टी-20 की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर बनी हुई है. इन सब में विराट कोहली का सबसे बड़ा हाथ है इस कारण हम यही कहेंगे कि महेंद्र सिंह धोनी को 2019 के विश्व कप में कप्तान बनाना सही फैसला होगा क्योंकि विराट आज एक शानदार कप्तान के अलावा बल्लेबाज भी हैं और लगातार टीम इंडिया को जीत दिलाते आ रहे हैं.


इस कारण विराट कोहली ही कप्तान बेहतर रह सकते हैं. विराट आज दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाज बनकर उभरे है और सचिन के रिकॉर्ड लगातार तोड़ते आ रहे है.



साथ ही आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों काफी खराब फॉर्म में चल रहे हैं. लेकिन सभी को उम्मीद यही है कि वह आगामी विश्व कप में जगह बनाकर अच्छा खेलेंगे और अपने लंबे करियर का समापन करेंगे. 2011 के विश्व कप में धोनी ने अपनी कप्तानी में छक्के की मदद से फाइनल मैच में भारत को जीताया था.

यह जरूर पढ़ें- दोस्तों जरूर पढ़िए कि आखिर क्यों इंडियन क्रिकेट टीम जीत सकती है 2019 क्रिकेट विश्वकप?

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दोस्तों क्या आप जानते हैं कि अगर धोनी 2003 विश्वकप टीम इण्डिया के लिए खेलते तो टीम इण्डिया विश्वकप जीत सकती थी

( India Could Have Won 2003 World Cup If MS Dhoni Was There )- धोनी 2003- साल 2003 का क्रिकेट विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे तथा केन्या में आयोजित किया गया था जिसमें ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को फाइनल में शिकस्त दी थी. उस समय भारतीय टीम की कप्तानी सौरव गांगुली के हाथों में थी जिन्होंने बखूबी निभाई लेकिन फाइनल नहीं जीत पाये थे.


अब लोगों का यह कहना है कि क्या धोनी अगर वो विश्व कप खेलते तो क्या भारत जीत सकता था. इस सवाल में हमने जो जवाब दिया है वो आप खुद नीचे देख सकते है.




धोनी अगर खेलते तो क्या भारत जीत सकता था 2003 का विश्व कप |India Could Have Won 2003 World Cup


जानकारी के लिए आपको बता दें कि एमएस धोनी जिन्होंने साल 2004 में भारतीय क्रिकेट टीम में कदम रखा था और जब यह टूर्नामेंट खेला जा रहा था उस समय माही का घरेलू सर्किट में कुछ ऐसा ख़ास प्रदर्शन नहीं था और साथ ही उस समय टीम इंडिया में विकेटकीपर के रूप में राहुल द्रविड़ सबसे उपयुक्त थे.



अगर हम याद करें तो, उस विश्वकप में भारतीय टीम ने काफी शानदार प्रदर्शन किया था और महज दो मैचों को जीत नहीं पाया था और यह दोनों मुकाबले ऑस्ट्रेलिया से हारे थे. फाइनल मुकाबले में भारत 7 बल्लेबाजों के साथ खेला था और हर एक अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन जीत नहीं सका था. अगर हम गेंदबाजों की बात करें तो दक्षिण अफ्रीकी परिस्थितियों में पेसर तिकड़ी (श्रीनाथ, जहीर और नेहरा) थे. सचिन और सहवाग के साथ-साथ पार्ट टाइमर्स के रूप में हरभजन स्पिन मुख्य स्पिनर थे. पूरे टूर्नामेन्ट में भारत का जलवा था. सचिन तेंदुलकर सबसे ज्यादा 673 रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे.

लेकिन हमारा यह मानना है कि अगर धोनी उस विश्व कप में खेलते तो शायद ही कोई फर्क पड़ता. दरअसल बात यह है कि टीम इंडिया मैनेजमेंट किसी अनुभवी को बाहर करके ऐसे बड़े टूर्नामेंट में युवा को मौका भी नहीं देना चाहती. अगर दे भी देती तो घरेलू मैदानों से एकदम धोनी अच्छा प्रदर्शन शायद ही कर पाते क्योंकि हमने देखा है कि अब तक भी माही का बल्ला एशिया में ही अच्छा चलता है.


विश्वकप 2003 उस समय के कप्तान सौरव  गांगुली का ब्यान देखिये 

खुद उस टीम के कप्तान सौरव गांगुली ने यह बात एक कार्यक्रम में स्वीकार की थी कि हाँ अगर धोनी टीम में होते तो टीम इण्डिया विश्वकप फाइनल मैच जीत सकती  थी. धोनी होते तो टीम इण्डिया की बल्लेबाजी में ऊपरी क्रम में तूफानी बल्लेबाज टीम के पास होता।

इस तरह इस फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया से 125 रनों के अंतर से हारना पड़ा था. लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी कप्तानी में 2011 में खेले गए विश्व कप में 28 सालों बाद खिताब जितवाया था. इससे पूर्व 2007 के टी-20 विश्व कप में भी ट्रॉफी उठाई थी.

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कप्तान विराट कोहली ने खोजे ऑस्ट्रेलिया टी20 सीरीज के लिए महेंद्र सिंह धोनी के 2 विकल्प, टीम को मिले नए फिनिशर

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया लगातार मेहनत करती हुई नजर आ रही है. आपको बता दें कि 21 नवंबर से शुरू होने वाली इस टेस्ट सीरीज पर विराट कोहली की साख दांव पर लगी हुई है. घर के बाहर जाकर कप्तान विराट कोहली को अपनी काबिलियत साबित करने का यह एक अच्छा मौका है. ऑस्ट्रेलिया टीम से इस समय स्टीव स्मिथ और साथ ही डेविड वॉर्नर भी बाहर हैं तो ऐसे में यहां विराट कोहली के पास एक अच्छा मौका है कि वह टीम को जीत दिलाकर ही घर वापस लौटें.


लेकिन टीम इंडिया के लिए मुश्किल यह है कि टीम में इस समय महेंद्र सिंह धोनी नहीं हैं. ऐसे में हर किसी की नजर रहने वाली है कि आखिर महेंद्र सिंह धोनी की कमी कौन पूरी करता हुआ नजर आएगा.


ऑस्ट्रेलिया टी20 सीरीज के लिए महेंद्र सिंह धोनी के 2 विकल्प




बल्लेबाजी के अंदर महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के लिए एक फिनिशर बल्लेबाज का रोल अदा करते हैं और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हो रही है इस टी20 सीरीज में अगर किन्हीं दो खिलाड़ियों की बात करें जिनके ऊपर काफी अधिक दबाव रहने वाला है तो ऐसे में उनका नाम कुणाल पांड्या और दिनेश कार्तिक है.


इन दोनों ही खिलाड़ियों को महेंद्र सिंह धोनी के तरीके से चलाकी के साथ बल्लेबाजी भी करनी है और टीम को जीत दिलानी है.


क्रुणाल पंड्या ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में 3 मैच खेले हैं और यहां पर इनके बल्ले से 21 रन निकले हैं और यह एक बार नॉटआउट रहे हैं. साथ ही साथ उन्होंने अभी तक 78 रन देकर एक विकेट भी ले रखा है.




वहीं दूसरी तरफ दिनेश कार्तिक एक सीनियर खिलाड़ी हैं और इन्होंने टी20 क्रिकेट में 24 मैच खेलकर 300 रन बना रखे हैं. साथ ही साथ इनकी औसत टी20 क्रिकेट फॉर्मेट में 33 की रही है. बेशक कार्तिक का यह रिकॉर्ड काफी अच्छा नहीं है लेकिन इस सीरीज में दिनेश कार्तिक को महेंद्र सिंह धोनी की तरह से ही एक फिनिशर के रूप में काम करना होगा.


तो भारत और आस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज में दिनेश कार्तिक और क्रुणाल पंड्या को धोनी की तरह से ही बल्लेबाजी करके इस सीरीज में महेंद्र सिंह धोनी का रोल अदा करना होगा.

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