ओपिनियन पोल- क्या दक्षिण अफ्रीका से तीसरा टेस्ट हारने पर कप्तान कोहली को खुद इन्डियन टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ देनी चाहिए?

ओपिनियन पोल- क्या दक्षिण अफ्रीका से तीसरा टेस्ट हारने पर कप्तान कोहली को खुद इन्डियन टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ देनी चाहिए?

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीसरा टेस्ट मैच आज 24 जनवरी से जोहांसबर्ग में शुरू हो रहा है. भारतीय क्रिकेट टीम के पास अब खोने के लिए कुछ भी नहीं बचा है. पहले ही इंडियन टीम सीरीज के दोनों टेस्ट मैच हार चुकी है और 2018 का पहला विदेशी दौरा भी हाथ से निकल चुका है. ऐसे में अब इंडियन टीम का ध्यान अंतिम टेस्ट मैच को जीत कर या फिर ड्रॉ करके अपनी कुछ बची हुई इज्जत को बचाने पर होगा.


वहीं दूसरी तरफ कप्तान कोहली जिनके ऊपर तीसरे टेस्ट मैच में काफी दबाव रहने वाला है और वह इस टेस्ट मैच में बेहतर प्रदर्शन करने की पुरजोर कोशिश करने वाले हैं. इंडियन क्रिकेट टीम ने जोहांसबर्ग क्रिकेट मैदान पर काफी अच्छा प्रदर्शन किया है. वहीं कप्तान कोहली और चेतेश्वर पुजारा का अभी जो इस क्रिकेट मैदान पर कुछ खास ही रिकॉर्ड रहा है.

ऐसे में इस लेटेस्ट मैच में भी कप्तान कोहली और चेतेश्वर पुजारा का ध्यान अच्छा प्रदर्शन करके टीम इंडिया को जीत दिलाने पर होगा. लेकिन अब विराट कोहली की कप्तानी पर भी उंगलियाँ उठने लगी हैं. क्या कप्तान विराट कोहली को छोड़ देनी चाहिए टेस्ट कप्तानी-भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीसरा टेस्ट मैच


भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीसरा टेस्ट मैच


जरुर दें आप अपना जवाब

लगातार देशी और विदेशी कई सीनियर खिलाड़ी विराट कोहली की कप्तानी पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं. कप्तान कोहली ने पिछले कुछ 30 टेस्ट मैचों में जिस तरीके से टीम में बदलाव किए हैं और लगातार लगभग हर टेस्ट मैच में बदली हुई टीम उतारी है, उसके बाद विराट कोहली की कप्तानी पर सवाल उठने लगे हैं. अगर कोई कप्तान लगातार अपनी टीम बदल रहा है तो इसका अर्थ यही होगा कि उसका विश्वास टीम पर नहीं बन पा रहा है.


भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीसरा टेस्ट मैच





कोहली का ऐसा मानना है कि बेशक उन्होंने 30 टेस्ट मैचों में कितनी भी बदलाव किए हैं लेकिन उनकी टीम को जीत मिलती रही है. लेकिन आपको याद दिला दें कि भारतीय क्रिकेट टीम पिछले कुछ डेढ़ सालों से भारत के अंदर ही खेल रही है और साल 2018 में दक्षिण अफ्रीका का यह दौरा कुछ पिछले 2 सालों का सबसे मुश्किल दौर आ रहा है और पहली ही विदेशी दौरे में टीम इंडिया को टेस्ट सीरीज हार का सामना करना पड़ा है.


भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीसरा टेस्ट मैच

कप्तान विराट कोहली की टेस्ट कप्तानी के ऊपर सवाल उठने लगे हैं. हर कोई जानना चाहता है कि क्या वाकई कप्तान विराट कोहली टेस्ट टीम के कप्तान बनने के लायक हैं? 30 में से कुछ 28 टेस्ट मैच इंडियन क्रिकेट टीम भारत और उपमहाद्वीप में खेली है. लगातार श्रीलंका के साथ बैक टू बैक सीरीज खेली है.  और और जिस तरीके की कमजोर टीम के साथ इंडियन टीम खेली है उसको आप जीत नहीं मान सकते हैं.

तो ऐसे में आप यह कमेंट करके बताएं कि क्या वाकई कप्तान विराट कोहली को इंडियन टेस्ट टीम का कप्तान बनने बने रहने देना चाहिए या फिर कप्तान कोहली की जगह पर अजिंक्या रहाणे जैसे धैर्यवान खिलाड़ी को कप्तान बनाना चाहिए. आपके जवाबों का हमको इन्तजार रहने वाला है.

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बड़ी वजह आई सामने, इसलिए 2019 विश्वकप में कोहली की जगह धोनी को बना देना चाहिए टीम इण्डिया का कप्तान

जैसे-जैसे आईसीसी क्रिकेट विश्वकप 2019 नजदीक आ रहा है लोगों में क्रेज और बढ़ रहा है. साथ ही भारतीय टीम भी लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूती और बढ़ा रही है. बता दें कि टीम इंडिया के वर्तमान कप्तान विराट कोहली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं और चौथे टेस्ट में काफी जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है. पहली पारी में 622 रनों के जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पारी 300 रन बनाकर सिमट गई और अभी फॉल ऑन कर रही है.


2019 का विश्व कप बेहद नजदीक है पहला मुकाबला 30 मई को इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच होगा. वहीं भारत का पहला मैच 5 जून को अफ्रीका के साथ ही खेला जाने वाला है. अब लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या महेंद्र सिंह धोनी को 2019 के विश्व कप में एक बार फिर से कप्तानी देनी चाहिए या नहीं. तो आज हम इसी सवाल के जवाब में आपको विस्तार से बताएंगे.



क्या धोनी को एक बार फिर सौंप देनी चाहिए 2019 के विश्वकप में कप्तानी?


जैसा कि आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी आज किसी भी प्रारूप में भारतीय टीम के कप्तान नहीं है. वर्तमान समय में विराट कोहली टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे हैं और काफी शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को नई-नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं. वनडे रैंकिंग में आज भारत दूसरे स्थान पर हैं तो टेस्ट में पहले पायदान पर और टी-20 की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर बनी हुई है. इन सब में विराट कोहली का सबसे बड़ा हाथ है इस कारण हम यही कहेंगे कि महेंद्र सिंह धोनी को 2019 के विश्व कप में कप्तान बनाना सही फैसला होगा क्योंकि विराट आज एक शानदार कप्तान के अलावा बल्लेबाज भी हैं और लगातार टीम इंडिया को जीत दिलाते आ रहे हैं.


इस कारण विराट कोहली ही कप्तान बेहतर रह सकते हैं. विराट आज दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाज बनकर उभरे है और सचिन के रिकॉर्ड लगातार तोड़ते आ रहे है.



साथ ही आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों काफी खराब फॉर्म में चल रहे हैं. लेकिन सभी को उम्मीद यही है कि वह आगामी विश्व कप में जगह बनाकर अच्छा खेलेंगे और अपने लंबे करियर का समापन करेंगे. 2011 के विश्व कप में धोनी ने अपनी कप्तानी में छक्के की मदद से फाइनल मैच में भारत को जीताया था.

यह जरूर पढ़ें- दोस्तों जरूर पढ़िए कि आखिर क्यों इंडियन क्रिकेट टीम जीत सकती है 2019 क्रिकेट विश्वकप?

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दोस्तों क्या आप जानते हैं कि अगर धोनी 2003 विश्वकप टीम इण्डिया के लिए खेलते तो टीम इण्डिया विश्वकप जीत सकती थी

( India Could Have Won 2003 World Cup If MS Dhoni Was There )- धोनी 2003- साल 2003 का क्रिकेट विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे तथा केन्या में आयोजित किया गया था जिसमें ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को फाइनल में शिकस्त दी थी. उस समय भारतीय टीम की कप्तानी सौरव गांगुली के हाथों में थी जिन्होंने बखूबी निभाई लेकिन फाइनल नहीं जीत पाये थे.


अब लोगों का यह कहना है कि क्या धोनी अगर वो विश्व कप खेलते तो क्या भारत जीत सकता था. इस सवाल में हमने जो जवाब दिया है वो आप खुद नीचे देख सकते है.




धोनी अगर खेलते तो क्या भारत जीत सकता था 2003 का विश्व कप |India Could Have Won 2003 World Cup


जानकारी के लिए आपको बता दें कि एमएस धोनी जिन्होंने साल 2004 में भारतीय क्रिकेट टीम में कदम रखा था और जब यह टूर्नामेंट खेला जा रहा था उस समय माही का घरेलू सर्किट में कुछ ऐसा ख़ास प्रदर्शन नहीं था और साथ ही उस समय टीम इंडिया में विकेटकीपर के रूप में राहुल द्रविड़ सबसे उपयुक्त थे.



अगर हम याद करें तो, उस विश्वकप में भारतीय टीम ने काफी शानदार प्रदर्शन किया था और महज दो मैचों को जीत नहीं पाया था और यह दोनों मुकाबले ऑस्ट्रेलिया से हारे थे. फाइनल मुकाबले में भारत 7 बल्लेबाजों के साथ खेला था और हर एक अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन जीत नहीं सका था. अगर हम गेंदबाजों की बात करें तो दक्षिण अफ्रीकी परिस्थितियों में पेसर तिकड़ी (श्रीनाथ, जहीर और नेहरा) थे. सचिन और सहवाग के साथ-साथ पार्ट टाइमर्स के रूप में हरभजन स्पिन मुख्य स्पिनर थे. पूरे टूर्नामेन्ट में भारत का जलवा था. सचिन तेंदुलकर सबसे ज्यादा 673 रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे.

लेकिन हमारा यह मानना है कि अगर धोनी उस विश्व कप में खेलते तो शायद ही कोई फर्क पड़ता. दरअसल बात यह है कि टीम इंडिया मैनेजमेंट किसी अनुभवी को बाहर करके ऐसे बड़े टूर्नामेंट में युवा को मौका भी नहीं देना चाहती. अगर दे भी देती तो घरेलू मैदानों से एकदम धोनी अच्छा प्रदर्शन शायद ही कर पाते क्योंकि हमने देखा है कि अब तक भी माही का बल्ला एशिया में ही अच्छा चलता है.


विश्वकप 2003 उस समय के कप्तान सौरव  गांगुली का ब्यान देखिये 

खुद उस टीम के कप्तान सौरव गांगुली ने यह बात एक कार्यक्रम में स्वीकार की थी कि हाँ अगर धोनी टीम में होते तो टीम इण्डिया विश्वकप फाइनल मैच जीत सकती  थी. धोनी होते तो टीम इण्डिया की बल्लेबाजी में ऊपरी क्रम में तूफानी बल्लेबाज टीम के पास होता।

इस तरह इस फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया से 125 रनों के अंतर से हारना पड़ा था. लेकिन महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी कप्तानी में 2011 में खेले गए विश्व कप में 28 सालों बाद खिताब जितवाया था. इससे पूर्व 2007 के टी-20 विश्व कप में भी ट्रॉफी उठाई थी.

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कप्तान विराट कोहली ने खोजे ऑस्ट्रेलिया टी20 सीरीज के लिए महेंद्र सिंह धोनी के 2 विकल्प, टीम को मिले नए फिनिशर

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया लगातार मेहनत करती हुई नजर आ रही है. आपको बता दें कि 21 नवंबर से शुरू होने वाली इस टेस्ट सीरीज पर विराट कोहली की साख दांव पर लगी हुई है. घर के बाहर जाकर कप्तान विराट कोहली को अपनी काबिलियत साबित करने का यह एक अच्छा मौका है. ऑस्ट्रेलिया टीम से इस समय स्टीव स्मिथ और साथ ही डेविड वॉर्नर भी बाहर हैं तो ऐसे में यहां विराट कोहली के पास एक अच्छा मौका है कि वह टीम को जीत दिलाकर ही घर वापस लौटें.


लेकिन टीम इंडिया के लिए मुश्किल यह है कि टीम में इस समय महेंद्र सिंह धोनी नहीं हैं. ऐसे में हर किसी की नजर रहने वाली है कि आखिर महेंद्र सिंह धोनी की कमी कौन पूरी करता हुआ नजर आएगा.


ऑस्ट्रेलिया टी20 सीरीज के लिए महेंद्र सिंह धोनी के 2 विकल्प




बल्लेबाजी के अंदर महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के लिए एक फिनिशर बल्लेबाज का रोल अदा करते हैं और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हो रही है इस टी20 सीरीज में अगर किन्हीं दो खिलाड़ियों की बात करें जिनके ऊपर काफी अधिक दबाव रहने वाला है तो ऐसे में उनका नाम कुणाल पांड्या और दिनेश कार्तिक है.


इन दोनों ही खिलाड़ियों को महेंद्र सिंह धोनी के तरीके से चलाकी के साथ बल्लेबाजी भी करनी है और टीम को जीत दिलानी है.


क्रुणाल पंड्या ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में 3 मैच खेले हैं और यहां पर इनके बल्ले से 21 रन निकले हैं और यह एक बार नॉटआउट रहे हैं. साथ ही साथ उन्होंने अभी तक 78 रन देकर एक विकेट भी ले रखा है.




वहीं दूसरी तरफ दिनेश कार्तिक एक सीनियर खिलाड़ी हैं और इन्होंने टी20 क्रिकेट में 24 मैच खेलकर 300 रन बना रखे हैं. साथ ही साथ इनकी औसत टी20 क्रिकेट फॉर्मेट में 33 की रही है. बेशक कार्तिक का यह रिकॉर्ड काफी अच्छा नहीं है लेकिन इस सीरीज में दिनेश कार्तिक को महेंद्र सिंह धोनी की तरह से ही एक फिनिशर के रूप में काम करना होगा.


तो भारत और आस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज में दिनेश कार्तिक और क्रुणाल पंड्या को धोनी की तरह से ही बल्लेबाजी करके इस सीरीज में महेंद्र सिंह धोनी का रोल अदा करना होगा.

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