FIFA वर्ल्ड कप 2022 के आयोजक भारतीय सेना की वीरता से है प्रभावित, दे सकते हैं वर्ल्ड कप की सुरक्षा संभालने की जिम्मेदारी

FIFA वर्ल्ड कप 2022 के आयोजक भारतीय सेना की वीरता से है प्रभावित, दे सकते हैं वर्ल्ड कप की सुरक्षा संभालने की जिम्मेदारी

2022 FIFA वर्ल्ड कप अब दूर नहीं इसके आयोजकों ने  विश्व कप की घोषणा कर दी. जिसमें 21 नवम्बर को तय करते हुए बताया गया कि 21 नवंबर को शुरू होने वाले विश्व कप का फाइनल 18 दिसंबर तक खेला जाएगा. वहीं साथ में हम आपको बता दें कि 2022 का टूर्नामेंट सबसे कम दिनों में खेला जाएगा. 21 नवंबर से यह केवल 18 दिसंबर तक ही खेला जाएगा. इसका मतलब हुआ कि फीफा वर्ल्ड कप महज 28 दिन का ही होगा.

इसी के साथ एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए, हम आपको बता दें कि इसके आयोजकों ने बड़ा फैसला लिया है कि विश्व कप फुटबॉल की सुरक्षा भारतीय सेना को दी जाए. दरअसल, 22 नवंबर 2008  में मुंबई हमले में भारतीय सेना का प्रदर्शन से प्रभावित होकर. फीफा वर्ल्ड कप के आयोजकों ने भारतीय सेना की ताकत और बल से प्रभावित होकर, विचार किया कि भारतीय सेना को आने वाले वर्ल्ड कप की सुरक्षा संभालनी चाहिए.


2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले में भारत को वह घाव मिले. जो शायद ही कभी भर पाएंगे 26 नवंबर को आतंकी हमले में 26 विदेशी नागरिकों सहित 166 लोगों की मौत हो गई थी. इस हमले ने भारत की नींद, सुख और चैन सब छीन लिया था. जिसमें भारतीय सेना ने अपना अहम योगदान देते हुए अपनी जान दाव पर लगा दी और लोगों को बचाते-बचाते  शहीद हो गए थे. उनका यह योगदान ना केवल भारत बल्कि बाकी देशों के लिए सराहनीय है. शायद इसीलिए ही फीफा वर्ल्ड कप में भारतीय सेना को बड़ी जिम्मेदारी देने की योजना बनाई जा रही है. फिलहाल तय किया गया है कि फुटबॉल कप 21 नवंबर से 18 दिसंबर तक 2022 में खेला जाएगा. जिसमें कड़ी सुरक्षा के बंदोबस्त की जरूरत है. महज 28 दिन तक चलने वाले इस विश्व फुटबॉल वर्ल्ड कप में खास तैयारियों के साथ फुटबॉल खेला जाएगा.

इस टूर्नामेंट में 32 देशों के खिलाड़ी खेलेंगे. अधिकारियों का कहना है कि मौसम को देखते हुए इसकी तारीख नवम्बर में तय की गई क्योंकि जून-जुलाई में खेलना सही नहीं सही नहीं होगा. जून में वहां पर ज्यादा गर्मी होती है.

जहां तक बात इसकी सुरक्षा को लेकर भारतीय सेना की है तो भारतीय सेना पर सभी को गर्व है. भारत के लिए गर्व की बात होगी कि सेना को 2022 फीफा वर्ल्ड कप में अपना योगदान देना का मौका मिलेगा. भारतीय सैनिक की वीरता और साहस हमेशा ही प्रशंसा के लायक रही है. यदि फीफा वर्ल्ड कप कि उन्हें जिम्मेदारी दी गई तो वह पूरे  बल के साथ अपनी सेवा देंगे.

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भारत के इस महान हॉकी खिलाड़ी को मैदान पर देखकर ही पाकिस्तान के खिलाड़ियों को लूजमोशन हो जाते थे, संघर्ष की अनोखी कहानी

संदीप सिंह की जीवनी, संदीप सिंह आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है. इन्होंने अपनी मेहनत को उस मुकाम तक पहुंचाया जिससे ये हॉकी को लेकर भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में प्रसिद्ध हो गए. कुछ पाना बहुत आसान नहीं होता संदीप का जीवन भी कुछ ऐसा ही रहा. इन्हें जीत आसानी से नहीं मिली लेकिन वह कुछ अलग तरह के खिलाड़ी निकले क्योकि इन्हें संघर्ष हॉकी में आने से पहले कम करना पड़ा बल्कि हॉकी में जाने के बाद ज्यादा संघर्ष किया मानों जैसे इनका जीवन ही पलट गया हो.

आइए आपको बता दें कि आखिर संदीप सिंह का जीवन किस तरह के संघर्ष में रहा. जो इनके ऊपर फिल्म तक बन गई जी हां हम बात कर रहे है उन्हीं संदीप सिंह की जिनकी बायोग्राफी सुरमा काफी हिट रही.


Sandeep singh biography in hindi


संदीप सिंह हरियाणा के जाट परिवार से हैं. इनके भाई हॉकी के बहुत अच्छे खिलाड़ी रहे जिन्होंने उन्हें शिक्षित करके एक अच्छा खिलाड़ी बना दिया. जनवरी 2004 में कुआलालंपुर में संदीप ने सुल्तान अजलान शाह कप से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की. उसी के साथ इन्होंने एथेंस ग्रीस में आयोजित ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में किया. 2004 में हुए जूनियर एशिया कप हॉकी में यह बड़े स्कॉलर रहे और भारत को खिताब दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई. अच्छी कामयाबी और मेहनत से इन्हें 2006 के वर्ल्ड कप के लिए चुना गया.

यहां तक संदीप मशहूर जरूर थे लेकिन विश्व में मशहूर तब हुए जब इनकी जिंदगी में वह मनहूस दिन आया. जिस दिन ने इन्हें तोड़ कर रख दिया. और  वह दिन था 22 अगस्त 2006.


हॉकी प्लयेर संदीप सिंह की कहानी | संदीप सिंह का जीवन

2006 के वर्ल्ड कप में जाने के लिए संदीप सिंह शताब्दी एक्सप्रेस में बैठे थे उन्हें क्या पता था कि इस वर्ल्डकप में जाने के लिए जो सपने देख रहे हैं. वो चूर-चूर हो जाएगा.  हुआ यह कि एक पुलिसकर्मी की बंदूक से गोली चली जो सीधे जाकर संदीप के पैर में जा लगी. जिससे यह पैरालाइज हो गए अब क्या था होनी को कौन टाल सकता है.

इस हादसे ने संदीप के सपनों पूरी तरह से तोड़ दिया पूरे 1 साल तक ये व्हीलचेयर पर बैठने के लिए मजबूर हो गए. लेकिन संदीप ने हिम्मत नहीं हारी और हौसले को बुलंद रखा. जो हॉकी इनकी जान थी उसी हॉकी से इन्होंने धीरे-धीरे खड़े होने की कोशिश की और करीब 6 महीने की स्पेशल ट्रीटमेंट से संदीप ना केवल खड़े हो पाए बल्कि तैयार हो गए फिर से हॉकी के मैदान में जाने के लिए.

इस तरह इन्होंने फिर से एक नई जिंदगी शुरू की और 2008 का सुल्तान अजलान शाह कप के साथ एक बिंदास तरीके से वापसी की. जिसके बाद संदीप हर अखबार की हैडलाइन बन गए. सुल्तान अजलान शाह कप में 8 गोल करके संदीप सिंह कमबैक के साथ दुनिया में मशहूर हो गए.

इनकी बेबाक और बिंदास तरीके को देखते हुए पाकिस्तान के कोच ने कह दिया कि तुम ऐसे कैसे खेलते हो कि हमारे खिलाड़ियों को तुम्हें देखकर लूजमोशन हो जाते हैं.

2009 में इंडियन हॉकी टीम के कप्तान बने और कप्तानी में भी इन्होंने भारत को नई जीत दिलाई. इनकी कप्तानी ने 13 साल बाद भारत ने अजलान शाह कप जीता. साथ ही इन्होंने 145  किलो मीटर की रफ्तार से ड्रैग फिक्ल करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया. 2012 में लंदन ओलंपिक के लिए क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 16 गोल का स्कोर करने वाले खिलाड़ी भी संदीप सिंह ही है.

आपको बता दें कि 2010 में भारत सरकार की तरफ से इन्हें अर्जुन अवार्ड दिया गया. इस तरह से संदीप ने पैरालाइज से लड़कर नया मुकाम हासिल किया और आज भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया में जाने-माने नंबर वन हॉकी खिलाड़ी बन गए. इस तरह से संदीप सिंह के जीवन की संघर्ष भरी कहानी जिससे हमें सीखना चाहिए कि मुश्किलें कितनी भी हो मंजिलों को नहीं छोड़ना चाहिए.

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दर्द भरी कहानी- ढाबे पर दूसरों के झूठे बर्तन धोता था ये भारतीय खिलाड़ी, अब विराट कोहली से मिलकर टीम इण्डिया के लिए बस खेलना चाहता है

संघर्ष करके अगर कोई खिलाड़ी किसी मुकाम पर पहुंचता है तो निश्चित रूप से यह कहानी पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन जाती है. आपको बता दें कि कई बार हमारे सामने इस तरीके की परिस्थितियां होती हैं कि हमें उनके आगे या तो समर्पण करना पड़ता है या फिर उनसे संघर्ष करना पड़ता है. जो लोग संघर्ष करते हैं वह लोग दूसरों से अलग इतिहास रचते हुए नजर आ सकते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही भारतीय खिलाड़ी की कहानी बताने वाले हैं जो एक समय अपनी गरीबी से तंग आकर ढाबे पर दूसरे लोगों के झूठे बर्तन साफ करने पर मजबूर हो गया था. दूसरों के झूठे बर्तन धोया करता था ये भारतीय खिलाड़ी लेकिन इस खिलाड़ी ने कभी हार नहीं मानी क्योंकि इसके सपने काफी ऊंचे हुआ करते थे. इस भारतीय खिलाड़ी का सपना विराट कोहली से मिलकर इंडियन टीम के लिए खेलने का है. तो आइए आपको बताते हैं कि वह खिलाड़ी कौन है जो कभी ढाबे के ऊपर दूसरे लोगों के झूठे बर्तन साफ किया करता था- दूसरों के झूठे बर्तन धोया करता था ये भारतीय खिलाड़ी भूखे पेट सोई, झूठे बर्तन साफ़ किये अब टीम इण्डिया के लिए खेल रही हैं भारतीय कबड्डी महिला टीम की खिलाड़ी कविता ठाकुर ने काफी संघर्ष करके इंडियन टीम में जगह बनाई है. इस महिला खिलाड़ी की कहानी निश्चित रूप से हम सभी के लिए एक सकारात्मक कहानी बन सकती है. कविता एशियन गेम 2018 में हिस्सा लेने भारतीय महिला कबड्डी टीम के साथ गई हुई है. हिमाचल के मनाली में इनका जन्म हुआ और वहीं पर जैसे तैसे गरीबी में उनका गुजारा हो रहा था. दूसरों के झूठे बर्तन धोया करता था ये भारतीय खिलाड़ी परिवार की स्थिति सही नहीं थी और दो वक्त की रोटी का भी जुगाड़ नहीं हो पा रहा था. यही कारण है कि कविता ठाकुर सड़क के किनारे एक बने हुए ढाबे पर काम किया करती थी और वहां पर झूठे बर्तन साफ करके जैसे तैसे अपना गुजारा कर रही थी. कविता ठाकुर इस साल एशियन गेम्स में टीम इंडिया को जीताने का सपना देख रही हैं. 2007 में कविता ने कबड्डी खेलना शुरू किया था और 2014 में एशियाड के अंदर सभी की इनके ऊपर नजर गई थी. कविता गोल्ड जीतने वाली उस समय पहली भारतीय महिला कबड्डी प्लेयर बनी थीं. आज भी कविता अपने परिवार के साथ एक किराए के मकान में रहती हैं लेकिन इनका सपना है कि वह भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली से मिलकर अपने खेल के ऊपर टिप्स लेना चाहती हैं. शायद इन खिलाड़ियों की मदद के लिए भारतीय खेल मंत्रालय को आगे आना चाहिए और इनको सुख सुविधा मिलनी चाहिए जैसे कि देश में नेताओं को मिलती हैं. आपको कविता की कहानी अच्छी लगे तो इसको शेयर जरूर करें.

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फीफा विश्वकप 2018 की विजेता फ़्रांस को मिले इतने 260 करोड़ रुपैय, तो उप-विजेता क्रोएशिया को भी मिली है बहुत ज्यादा बड़ी रकम

15 जुलाई(रविवार) को एक महीनें से चले आ रहे फीफा वर्ल्ड कप 2018 का सफल समापन हुआ. फाइनल मुकाबले में फ्रांस ने रूस की राजधानी मॉस्को के लुज्निकी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में क्रोएशिया को एक बेहद रोमांचक मुकाबले में 4-2 से हराकर खिताब अपने नाम किया. फुटबॉल का खेल दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद जाने वाला खेल हैं. ऐसे में फीफा वर्ल्डकप का आयोजन करने करने वाले अधिकारी इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेनी वाली टीमो पर जमकर पैसे की बारिश करते हैं. फ्रांस के चैंपियन बनाने के बाद फैन्स के मन भी प्रश्न उठ रहा होगा कि आखिर फीफा वर्ल्डकप जीतने वाली टीम को इनाम के रूप में कितनी राशी दी जाती हैं. इस लेख में हम फैन्स के इन्ही प्रश्नों का जवाब देगे. फीफा विश्वकप 2018 फीफा वर्ल्डकप 2018 चैंपियन बनने वाली फ्रांस टीम को इनाम राशी के रूप में 38 मिलियन डॉलर(लगभग 260 करोड़ रूपए) दिए गए. इसके आलावा फाइनल में हारने वाली उपविजेता क्रोएशिया को 28 मिलियन डॉलर (लगभग 191 करोड़ रूपए) दिए गए. फीफा विश्वकप 2018 इंग्लैंड को हराने के बाद टूर्नामेंट में नंबर 3 पर रहने वाली बेल्जियम को इनाम के रूप में करीब 164 करोड़ रूपए दिए गए. जबकि क्वार्टरफाइनल में हारने वाली उरुग्वे, ब्राजील, स्वीडन और रूस टीम को इनाम राशी के रूप में 110-110 करोड़ रूपए दिए गए. प्रमुख 16 में जगह बनाने के बाद हारने वाली टीमो को भी इनाम के रूप में 82-82 करोड़ रूपए दिए गए. फीफा विश्वकप 2018 इन सब के आलावा ग्रुप स्टेज से बाहर होने वाली प्रत्येक टीम को करीबन 55-55 करोड़ रूपए दिए हैं. फीफा वर्ल्डकप 2018 के दौरान इनाम राशी के रूप में लगभग 400 मिलियन डॉलर (करीबन करीबन 2700 करोड़ रूपए) बांटे गए. यह एक ऐसा आंकड़ा हैं, जिस पर शायद यकीन करना आसान नहीं हैं, लेकिन यह सच हैं.   

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