टाइल की फैक्ट्री में काम करने वाला खिलाड़ी इंडियन टीम को जीता चुका है विश्वकप, पढ़िए इस भारतीय क्रिकेटर की अनसुनी कहानी

टाइल की फैक्ट्री में काम करने वाला खिलाड़ी इंडियन टीम को जीता चुका है विश्वकप, पढ़िए इस भारतीय क्रिकेटर की अनसुनी कहानी

मुनाफ पटेल की जीवनी- भारत क्रिकेट टीम के लिए यह गर्व की बात है कि मुनाफ पटेल जैसा बेहतरीन गेंदबाज टीम में शामिल रहा और सन्यास लेने से पहले इंडियन टीम के लिए अपना योगदान देता रहा है. सन्यास लेने से पहले मुनाफ पटेल ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 15 सालों में 13 टेस्ट और 70 वनडे इंटरनेशनल मैच इंडिया के लिए खेले थे.


आपको बता दें कि मुनाफ पटेल गुजरात के रहने वाले हैं. एक छोटे से गांव इखार में टाइल के डिब्बों की पैंकिग का काम वह करते थे. 8 घंटे काम करने के बाद उनको 35 रुपये मिलता था. विश्वास करना थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन यह सच है कि मुनाफ पटेल जो भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक थे, जिन्होंने भारत को कई बार जीत हासिल करवाने में मदद की थी वह कभी मजदूरी का काम करते थे.




मुनाफ पटेल की जीवनी | Munaf Patel Biography in Hindi


इससे आप समझ सकते हैं कि मुश्किलों से भरा सफर उन्होंने कैसे तय किया होगा. एक इंटरव्यू के दौरान मुनाफ पटेल ने स्वीकार किया था कि उनके जीवन में इतना दुख था कि उनको झेलने की आदत हो गई थी. पैसे ना होने की वजह से वह मजदूरी का काम करते थे.

उनके घर में सिर्फ उनके पिता ही कमाने वाले थे. जिसकी वजह से उनको भी अपना कदम घर से बाहर निकालना पड़ा. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि आज वह जो भी है वह सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट के बदौलत हैं.




रास्ते में कई कांटे बिछे थे इसके बावजूद मुनाफ पटेल ने कभी हार नहीं मानी थी. इन्होनें साल 2006 में इंटरनेशनल डेब्यू किया था. आईपीएल में पहले ‘गुजरात लायन्स’ और फिर ‘मुंबई इंडियन्स’ के लिए खेलने वाले मुनाफ अब आगमी टी-10 लीग का हिस्सा होंगे. जहां पर वह राजपूत टीम की ओर से खेलेंगे.




मुश्किलों से ना हारने वाले मुनाफ पटेल भारत को साल 2011 में वर्ल्डकप दिलवाने में सहयोगी बने थे क्योंकि इस विश्वकप में मुनाफ पटेल ने 11 विकेट लिए थे. बता दें उस वक्त मुनाफ पटेल तीसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थेे. लेकिन अब मुनाफ पटेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायरमेंट ले ली है.


उन्होंने कहा, ‘मुझे किसी बात का मलाल नहीं.मैं जिन भी क्रिकेटरों के साथ खेला, वो सब रिटायर हो चुके हैं. बस धोनी बचे हैं. इसलिए अब कोई दुख नहीं. सबका टाइम खत्म हो चुका है, गम तब होता जब बाकी खेल रहे होते और मैं रिटायर होता. मेरा मन आज भी नहीं मान रहा कि मैं क्रिकेट छोड़ूं, क्योंकि इसके अलावा मुझे कुछ आता भी नहीं है.बस क्रिकेट ही समझ आता है.


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मुनाफ पटेल को देखकर तो ऐसा लगता है कि हमें कभी भी किसी भी तरीके के मुसीबतों से हार नहीं मानी चाहिए. ना हार मानने वाले व्यक्ति एक ऐसे योद्धा होते हैं जो अपने जीवन की एक नई कहानी लिखते हैं. आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा. हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं.

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