Five players who used heavy bats | इन 5 बल्लेबाज़ों के दौरान इस्तेमाल से किये सबसे भारी बैट

Five players who used heavy bats | इन 5 बल्लेबाज़ों के दौरान इस्तेमाल से किये सबसे भारी बैट

Five players who used heavy bats- क्रिकेट के खेल में बल्लेबाज़ के लिए उसका बैट काफी मायने रखता है. हालाँकि समय के साथ-साथ क्रिकेट के खेल और उसके टूल्स में लगातार बदलाव हो रहे हैं. लेकिन बल्लेबाज़ अपने बैट को आपनी सहूलियत के अनुसार तैयार करवाता हैं. आज इस लेख में हम 5 ऐसे बल्लेबाजों के बारे में बात करेगे जो अपने करियर के दौरान भारी बैट का इस्तेमाल करने के लिए मशहुर रहे:-

5) सचिन तेंदुलकर- एमआरएफ/एडिडास स्टीकर : (1.47kg)




सचिन तेंदुलकर ने अपने अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट करियर के दौरान कई बड़े रिकॉर्ड बनायें. उनके बैट में भारी एज के साथ एक मोटी प्रोफ़ाइल थी. 1996 क्रिकेट विश्वकप की शुरुआत तक लिटिल मास्टर के बैट पर किसी भी स्पोंसर का स्टीकर नहीं था, हालाँकि टूर्नामेंट के अंत में, टायर बनाने वाली मशहुर कंपनी  एमआरएफ ने उनके साथ करार किया.

सचिन तेंदुलकर के बैट का वजन एक समय 1.47kg था, हालाँकि टेनिस एल्बो की समस्या के बाद वह हल्के बैट का प्रयोग करने लगे थे.

4) वीरेंद्र सहवाग- हीरो हौंडा स्टीकर: (1.35kg)




टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग अपने दौरे के सबसे विस्पोटक बल्लेबाजों में से एक रहे हैं. सहवाग टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले भारत के पहले बल्लेबाज़ भी हैं. बल्लेबाजी के दौरान बाउंड्री पर ज्यादा निर्भर रहने वाले सहवाग ने अपने अन्तराष्ट्रीय करियर के दौरान SG VS 319 का बैट इस्तेमाल किया, जिस पर हीरो हौंडा का स्टीकर दिखाई देता था. इस बैट का वजन 1.35kg था.


3) डेविड वॉर्नर- ग्रे निकोल्स काबूम- (1.24kg)




ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज़ डेविड वॉर्नर ने अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद एक दुनिया के सबसे विस्पोटक बल्लेबाज़ के रूप में स्थापित किया हैं. एक खतरनाक रूप से बड़ी प्रोफ़ाइल और भारी एज के बैट के साथ बल्लेबाजी करना, और उसके हाथों में अत्यधिक शक्ति के कारण वह मैदान के किसी भी कोने में छक्के लगाने में माहिर हैं.

वॉर्नर का बल्ला क्रिस गेल के तरह ज्यादा बड़ा नहीं हैं, लेकिन वह उनकी तरह तूफानी बल्लेबाजी करने में पूरी तरह से सक्षम हैं. वॉर्नर के बैट का वजन 1.24kg हैं.

2) लांस क्लूसनर- एसएस जुलू- (1.53kg)




दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज हरफनमौला खिलाड़ी लांस क्लूसनर एसएस जुलू का बैट इस्तेमाल करते थे. जिसके कारण उनका निकनेम जुलू पड़ गया था. क्लूसनर अपने करियर के दौरान एक बेहद भारी बल्ला इस्तेमाल किया करते थे. इस बैट का प्रयोग करने से पहले क्लूसनर बेहद ख़राब फॉर्म से गुजर रहे थे, हालाँकि इस बैट आने के कुछ मैच बाद ही उन्होंने वर्ष 1999 में इंग्लैंड के विरुद्ध 174 रनों की यादगार पारी खेली. लांस क्लूसनर के बैट का वजन 1.53kg था.

1) क्रिस गेल- स्पार्टन सीजी ‘द बॉस’ : (1.36kg)




वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज़ क्रिस गेल वर्तमान में दुनिया के सबसे विस्पोटक बल्लेबाज़ हैं. गेल अपनी बल्लेबाजी के दौरान चौके से ज्यादा छक्के लगाने में विश्वास रखते हैं. दरअसल अपने बैट पर स्पार्टन सीजी ‘द बॉस’ का स्टीकर लगाकर बल्लेबाजी करते हैं. जिसका वजन 1.36kg हैं. इसी बैट से उन्होंने आईपीएल 2012 में पुणे वारियर्स के विरुद्ध 175 रनों की पारी खेली थी.

तो अभी तक क्रिकेट के इतिहास में इतने भारी बैट इन्हीं 5 खिलाड़ियों ने इस्तेमाल किये हैं. अब नए खिलाड़ी हल्के बल्ले का इस्तेमाल करते हुए नजर आ रहे हैं|

0 Comment

8 करोड़ 40 लाख में बिकने वाले वरुण चक्रवर्ती का पूरा बायोडाटा, नौकरी छोड़ बना क्रिकेटर, पढ़िए वरुण के बारें में 7 अनसुनी रोचक बातें

Who is Varun Chakravarthy- आईपीएल 2019 की नीलामी में वरुण चक्रवर्ती एक ऐसा नाम निकल कर आया है जिसकी बोली ने सभी को हैरान कर दिया है. आठ करोड़ 40 लाख में किंग्स इलेवन पंजाब में वरुण चक्रवर्ती को खरीदा है और अब हर कोई वरुण चक्रवर्ती का बायोडाटा खोज रहा है कि वरुण चक्रवर्ती आखिर कौन है.


तो आइए आज हम आपको वरुण चक्रवर्ती के बारे में 7 खास बातें बताते हैं और साथ ही साथ और चक्रवर्ती का बायोडाटा भी आपको दिखाते हैं-




वरुण चक्रवती का बायोबॉटा | Varun Chakravarthy Profile In Hindi


वरुण चक्रवर्ती तमिलनाडु से नाता रखते हैं और एक मध्यम वर्गीय फैमिली से चक्रवर्ती निकलकर आये हैं. वरुण ने अपनी पढ़ाई तमिलनाडु से ही पूरी की है. वरुण चक्रवर्ती ने कभी पढ़ाई के लिए क्रिकेट को छोड़ दिया था. वरुण ने स्कूल लेवल पर ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था और शुरुआत में यह तेज गेंदबाज थे. स्कूल में यह विकेटकीपिंग भी करते थे. चोट लगने के चलते वरुण चक्रवर्ती एक स्पिनर गेंदबाज बन गए. चक्रवर्ती ने 5 साल तक आर्किटेक्ट का कोर्स किया और बाद में यह इसी फील्ड में 2 साल नौकरी भी करते रहे लेकिन नौकरी में वरुण चक्रवर्ती का मन नहीं लगा बाद में बहुत अधिक मेहनत करने के बाद यह क्रिकेटर बन पाए हैं.




वरुण चक्रवती के बारें में 7 अनसुनी बातें | Varun Chakravarthy in IPL Auction 2019


1. वरुण चक्रवर्ती कभी सीएसके और केकेआर को नेट में बोलिंग किया करते थे. वरुण चक्रवर्ती को सुपर किंग और कोलकाता नाइट राइडर्स दोनों ही टीमों ने बारी-बारी से अपने यहां पर नेट में बॉलिंग कर रखा था.


2. विजय हजारे ट्रॉफी में 9 मैचों में 22 विकेट लेकर वरुण चक्रवर्ती ने सभी को हैरान कर दिया था और अचानक से ही अपनाना हम इतने ऊपर लेकर आ गए.


3. वरुण चक्रवर्ती लेग ब्रेक गुगली करते हैं और साथ ही साथ यह मिडल ऑर्डर में काफी अच्छी बल्लेबाजी भी करते हैं.


4. वरुण चक्रवर्ती के पास 7 तरीके की वेरिएशन हैं जो चक्रवर्ती को कितना खास गेंदबाज बना देता है, चक्रवर्ती के जिन को समझ पाना काफी मुश्किल होता है.


5. चक्रवर्ती कभी फास्ट बॉलर बनना चाहते थे लेकिन चोट लगने के चलते स्पिनर गेंदबाज बन पाए थे.


6. वरुण चक्रवर्ती का सपना विकेट कीपिंग का भी था और यह स्कूल लेवल पर काफी अच्छी विकेटकीपिंग भी करते थे लेकिन बाद में यह है गेंदबाज बन गए और चोट लगने के चलते स्पिनिंग गेंदबाजी करने लगे.


7. वरुण चक्रवर्ती ने पढ़ाई के लिए कभी क्रिकेट को छोड़ दिया था लेकिन किस्मत इनको वापस क्रिकेट के मैदान पर ले आई.


देखना होगा कि आईपीएल 2019 में वरुण चक्रवर्ती किस तरह की का प्रदर्शन करके किंग्स इलेवन पंजाब की इस गोली को सही बताते हुए नजर आते हैं. वरुण चक्रवर्ती पर इस बार सभी की निगाह रहने वाली है.


0 Comment

परिवार के मना करने और लोगों के हसनें पर भी झूलन गोस्वामी ने कभी हार नहीं मानी, पापा से बोला था मैं क्रिकेटर बनकर दिखाऊंगी पापा

एक वक्त था कि महिलाओं के क्रिकेट खेलने को लेकर लोग हंसी मजाक मानते थे. जहां महिला क्रिकेट खेलने की बात करती थी वहीं उनकी हंसी उड़ाई जाती थी. लेकिन वक्त बदला और महिला खिलाड़ी के एक से एक चेहरे निखरकर सामने आने लगे, अब जो लोग महिलाओं की हंसी लेते थे वही आज शाबाशी भी देने लगे और दे भी क्यों ना, महिलाएं लड़कर यह लड़ाई जो जीती हैं.

एक से एक रिकॉर्ड कायम करके महिला क्रिकेटर किसी पुरुष क्रिकेटर से कम नहीं है यदि अंतर है तो सिर्फ इतना कि महिला क्रिकेट में लोग कम रूचि लेते हैं. आज हम आपको महिला खिलाड़ी झूलन गोस्वामी का परिचय देंगे जिसे जानकर आपकी रूचि महिला क्रिकेट की तरफ जरूर बढ़े


jhulan goswami biography | क्रिकेटर झूलन गोस्वामी की जीवनी


झूलन गोस्वामी के ऐसे 10 तथ्य जिन्हें जानकर आप अचंभित हो जाएंगे


1. आपको बता दें कि झूलन गोस्वामी का जन्म 25 नवंबर 1983 में पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में हुआ. झूलन गोस्वामी की हाइट 5 फुट 11 इंच है जो खुद में दर्शाती है कि यह किसी पुरुष खिलाड़ी से कम नहीं है.


2. झूलन गोस्वामी सितंबर 2007 में सुर्खियों में आई क्योंकि इन्हें विश्व की सबसे तेज गेंदबाज घोषित करते हुए आईसीसी रैंकिंग में महिला क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया.


3. झूलन गोस्वामी एक बेहतरीन गेंदबाज है इनकी गेंदबाजी की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा है जो विश्व महिला क्रिकेट में सर्वाधिक है. यही कारण है कि आईसीसी ने इन्हें विश्व की सबसे तेज महिला गेंदबाज घोषित किया.


4. झूलन सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली दूसरी महिला क्रिकेटर हैं इन्होंने 79 एकदिवसीय मैचों में 96 विकेट लिए हैं.




5.यहां तक पहुंचने में झूलन ने बहुत कड़ी मेहनत की क्योंकि इनके क्रिकेटर बनने में इनकी मां- बाप इनसे नाराज रहते थे एक बार तो ये क्रिकेट खेलकर रात में घर देरी से पहुंची थी तो इनकी मां ने इन्हें बाहर ही खड़े रखा.


6. आज वही झूलन गोस्वामी नदिया एक्सप्रेस के नाम से जाने जाती हैं. बता दें कि झूलन ने अपना पहला टेस्ट मैच लखनऊ में इंग्लैंड की टीम के विरुद्ध 2002 में खेला था तब वह केवल 18 साल की थी.


7. उन्होंने 2007 तक 8 टेस्ट मैच खेले जिसमें 33 विकेट हासिल किए झूलन कभी भी विकेट लेने में पीछे नहीं रही. इस लीसेस्टर में हुई एक सीरीज के मैच में झूलन ने 78 रन देकर 10 विकेट लिए.


8. झूलन कहती हैं कि ज्यादातर लोग नहीं जानते कि “महिलाएं भी क्रिकेट खेलती है लेकिन मीडिया के कवरेज के बाद भारत में महिला क्रिकेट को भी जाना गया."




9. झूलन को 2006 में मुंबई के कैस्ट्रोल की तरफ से स्पेशल अवॉर्ड भी दिया गया.


10. शुरूआत में इन्होनं अपनी प्रैक्टिस लड़को के साथ की थी. वो इनकी बॉलिग करने पर हंसते थे जो इन्हें बिल्कुल भी पसमद नहीं था लेकिन हार ना मानते हुए मेहनत करके आज ये दुनिया की सबसे बेहरतीन बल्लेबाजी करने वाली महिला खिलाड़ी बनी गई.


Also Read


टाइल की फैक्ट्री में काम करने वाला खिलाड़ी इंडियन टीम को जीता चुका है विश्वकप, पढ़िए इस भारतीय क्रिकेटर की अनसुनी कहानी


इंडियन क्रिकेट टीम का ऐसा खिलाड़ी जो बारहवीं पढ़ने के बाद मजदूरी करते-करते बना क्रिकेटर, दो वक़्त की रोटी खाने के लिए भी कभी पैसे नहीं बचे थे


परिवार के मना करने पर और लोगों के हसनें पर भी झूलन गोस्वामी ने हार नहीं मानी और कर दिखाया यदि कुछ करने का जज्बा हो तो लोगों क्या कहते और आपके बारें क्या सोचते है कोई भी फर्क नहीं पड़ता. आपके सपने केवल आपके ही हैं और आप ही उन सपनों को मंजिल दे सकते है.

0 Comment

टाइल की फैक्ट्री में काम करने वाला खिलाड़ी इंडियन टीम को जीता चुका है विश्वकप, पढ़िए इस भारतीय क्रिकेटर की अनसुनी कहानी

मुनाफ पटेल की जीवनी- भारत क्रिकेट टीम के लिए यह गर्व की बात है कि मुनाफ पटेल जैसा बेहतरीन गेंदबाज टीम में शामिल रहा और सन्यास लेने से पहले इंडियन टीम के लिए अपना योगदान देता रहा है. सन्यास लेने से पहले मुनाफ पटेल ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 15 सालों में 13 टेस्ट और 70 वनडे इंटरनेशनल मैच इंडिया के लिए खेले थे.


आपको बता दें कि मुनाफ पटेल गुजरात के रहने वाले हैं. एक छोटे से गांव इखार में टाइल के डिब्बों की पैंकिग का काम वह करते थे. 8 घंटे काम करने के बाद उनको 35 रुपये मिलता था. विश्वास करना थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन यह सच है कि मुनाफ पटेल जो भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक थे, जिन्होंने भारत को कई बार जीत हासिल करवाने में मदद की थी वह कभी मजदूरी का काम करते थे.




मुनाफ पटेल की जीवनी | Munaf Patel Biography in Hindi


इससे आप समझ सकते हैं कि मुश्किलों से भरा सफर उन्होंने कैसे तय किया होगा. एक इंटरव्यू के दौरान मुनाफ पटेल ने स्वीकार किया था कि उनके जीवन में इतना दुख था कि उनको झेलने की आदत हो गई थी. पैसे ना होने की वजह से वह मजदूरी का काम करते थे.

उनके घर में सिर्फ उनके पिता ही कमाने वाले थे. जिसकी वजह से उनको भी अपना कदम घर से बाहर निकालना पड़ा. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि आज वह जो भी है वह सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट के बदौलत हैं.




रास्ते में कई कांटे बिछे थे इसके बावजूद मुनाफ पटेल ने कभी हार नहीं मानी थी. इन्होनें साल 2006 में इंटरनेशनल डेब्यू किया था. आईपीएल में पहले ‘गुजरात लायन्स’ और फिर ‘मुंबई इंडियन्स’ के लिए खेलने वाले मुनाफ अब आगमी टी-10 लीग का हिस्सा होंगे. जहां पर वह राजपूत टीम की ओर से खेलेंगे.




मुश्किलों से ना हारने वाले मुनाफ पटेल भारत को साल 2011 में वर्ल्डकप दिलवाने में सहयोगी बने थे क्योंकि इस विश्वकप में मुनाफ पटेल ने 11 विकेट लिए थे. बता दें उस वक्त मुनाफ पटेल तीसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थेे. लेकिन अब मुनाफ पटेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायरमेंट ले ली है.


उन्होंने कहा, ‘मुझे किसी बात का मलाल नहीं.मैं जिन भी क्रिकेटरों के साथ खेला, वो सब रिटायर हो चुके हैं. बस धोनी बचे हैं. इसलिए अब कोई दुख नहीं. सबका टाइम खत्म हो चुका है, गम तब होता जब बाकी खेल रहे होते और मैं रिटायर होता. मेरा मन आज भी नहीं मान रहा कि मैं क्रिकेट छोड़ूं, क्योंकि इसके अलावा मुझे कुछ आता भी नहीं है.बस क्रिकेट ही समझ आता है.


Also Read


इंडियन क्रिकेट टीम का ऐसा खिलाड़ी जो बारहवीं पढ़ने के बाद मजदूरी करते-करते बना क्रिकेटर, दो वक़्त की रोटी खाने के लिए भी कभी पैसे नहीं बचे थे


आस्ट्रेलिया के खिलाफ 500 रन बनाते ही विराट कोहली तोड़ देंगे सचिन तेंदुलकर का टेस्ट क्रिकेट में यह महान रिकार्ड


मुनाफ पटेल को देखकर तो ऐसा लगता है कि हमें कभी भी किसी भी तरीके के मुसीबतों से हार नहीं मानी चाहिए. ना हार मानने वाले व्यक्ति एक ऐसे योद्धा होते हैं जो अपने जीवन की एक नई कहानी लिखते हैं. आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा. हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं.

0 Comment