Inspirational story- भारत के छोटे से शहर का लड़का कड़ी मेहनत से बना क्रिकेटर, माँ ने मरते वक़्त यही बोला था बेटा तुझे इंडियन टीम में खेलना है

Inspirational story- भारत के छोटे से शहर का लड़का कड़ी मेहनत से बना क्रिकेटर, माँ ने मरते वक़्त यही बोला था बेटा तुझे इंडियन टीम में खेलना है

Inspirational story- “अगर किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे मिलाने की कोशिश करती है” आपने यह डायलॉग फिल्म में सुना होगा. कई फिल्म के डायलॉग असल जिंदगी के मायने बताते हैं. इसमें कहीं ना कहीं सच्चाई छुपी हुई होती है. कुछ प्रेरित करने वाली कहानियों से ही यह सारी चीजें निकल कर आती है. कहते हैं जिंदगी में कुछ भी नामुमकिन नहीं है, और कोई ऐसा इंसान नहीं जो नामुमकिन को मुमकिन न बना सके.


आज एक ऐसे ही कहानी से आपको रूबरू कराएंगे जिससे आप इन शब्दों का सही मूल्य जान पाएंगे. आपको कई बार ये सुनने को मिला होगा कि सपने वही देखना चाहिए जिसे आप पूरा कर सकें. लेकिन आज की कहानी आपको यह बताएगी कि सपने वह देखना चाहिए जिसे पाने के लिए जुनून पैदा हो सके.


Ravindra Jadeja biography story in Hindi |  रविंद्र जडेजा बायोग्राफी हिंदी


रविंद्र जडेजा की कहानी भी कुछ ऐसा ही है. जिसने अपनी मेहनत और लगन से नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया. आपको जानकर हैरानी होगी कि रविंद्र जडेजा जो भारत टीम के ऑलराउंडर क्रिकेटर में से एक हैं,वह कभी वॉचमैन का काम किया करते थे. गरीबी के हालत में होने के बावजूद उन्होंने कभी भी अपना कदम पीछे नहीं हटाया. बचपन से ही उनके अंदर एक जुनून था. जिसके वजह से आज वह भारतीय क्रिकेट टीम के मेंबर है. बता दें उन्होंने आईआईसी टेस्ट रैंकिंग में पहला स्थान प्राप्त किया हैं.




रविंद्र जडेजा की घर की स्थिति ठीक नहीं थी. इनके पिता एक प्राइवेट कंपनी में चौकीदार थे. हालत ठीक ना होने के बावजूद उनके पिता ने रविंद्र जडेजा को एक क्रिकेट एकेडमिक मे दाखिला करवाया. जडेजा की मां का भी यही सपना था कि वह भारत टीम के लिए खेले. लेकिन साल 2005 में एक एक्सीडेंट में जडेजा की मां की मौत हो गई. जिसके बाद वह पूरी तरीके से टूट गए. रविंद्र जडेजा इतना परेशान हो चुके थे कि वह क्रिकेट छोड़ने को तैयार थे. लेकिन अंत में मां के सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करने लगे. फिर इनकी कड़ी मेहनत ने असंभव को संभव बनाया.



साल 2005 में अंडर-19 के लिए वह चुने गए. उसके बाद 2006 में उन्होंने अंडर-19 के तहत वर्ल्ड कप खेला.2007 में जब उनको राजस्थान रॉयल्स की टीम में लाया गया तो उन्होंने अपना धमाल दिखाया. जिसके तुरंत बाद उनको इंडियन क्रिकेट टीम के लिए चुना गया. लेकिन 2009 में T20 इंग्लैंड के खिलाफ अपनी धीमी पारी के लिए रविंद्र जडेजा को आलोचना भी झेलनी पड़ी थी.


बात यहां तक आ गए कि उनको इंडियन क्रिकेट टीम से हटाने की बात होने लगी. कप्तान विराट कोहली ने जडेजा को एक बार फिर मौका दिया. जिसके बाद रविंद्र जडेजा ने दुबारा पलटकर नहीं देखा. उनकी मेहनत की ऊंचाई बढ़ती चली गई. आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं.


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8 करोड़ 40 लाख में बिकने वाले वरुण चक्रवर्ती का पूरा बायोडाटा, नौकरी छोड़ बना क्रिकेटर, पढ़िए वरुण के बारें में 7 अनसुनी रोचक बातें

Who is Varun Chakravarthy- आईपीएल 2019 की नीलामी में वरुण चक्रवर्ती एक ऐसा नाम निकल कर आया है जिसकी बोली ने सभी को हैरान कर दिया है. आठ करोड़ 40 लाख में किंग्स इलेवन पंजाब में वरुण चक्रवर्ती को खरीदा है और अब हर कोई वरुण चक्रवर्ती का बायोडाटा खोज रहा है कि वरुण चक्रवर्ती आखिर कौन है.


तो आइए आज हम आपको वरुण चक्रवर्ती के बारे में 7 खास बातें बताते हैं और साथ ही साथ और चक्रवर्ती का बायोडाटा भी आपको दिखाते हैं-




वरुण चक्रवती का बायोबॉटा | Varun Chakravarthy Profile In Hindi


वरुण चक्रवर्ती तमिलनाडु से नाता रखते हैं और एक मध्यम वर्गीय फैमिली से चक्रवर्ती निकलकर आये हैं. वरुण ने अपनी पढ़ाई तमिलनाडु से ही पूरी की है. वरुण चक्रवर्ती ने कभी पढ़ाई के लिए क्रिकेट को छोड़ दिया था. वरुण ने स्कूल लेवल पर ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था और शुरुआत में यह तेज गेंदबाज थे. स्कूल में यह विकेटकीपिंग भी करते थे. चोट लगने के चलते वरुण चक्रवर्ती एक स्पिनर गेंदबाज बन गए. चक्रवर्ती ने 5 साल तक आर्किटेक्ट का कोर्स किया और बाद में यह इसी फील्ड में 2 साल नौकरी भी करते रहे लेकिन नौकरी में वरुण चक्रवर्ती का मन नहीं लगा बाद में बहुत अधिक मेहनत करने के बाद यह क्रिकेटर बन पाए हैं.




वरुण चक्रवती के बारें में 7 अनसुनी बातें | Varun Chakravarthy in IPL Auction 2019


1. वरुण चक्रवर्ती कभी सीएसके और केकेआर को नेट में बोलिंग किया करते थे. वरुण चक्रवर्ती को सुपर किंग और कोलकाता नाइट राइडर्स दोनों ही टीमों ने बारी-बारी से अपने यहां पर नेट में बॉलिंग कर रखा था.


2. विजय हजारे ट्रॉफी में 9 मैचों में 22 विकेट लेकर वरुण चक्रवर्ती ने सभी को हैरान कर दिया था और अचानक से ही अपनाना हम इतने ऊपर लेकर आ गए.


3. वरुण चक्रवर्ती लेग ब्रेक गुगली करते हैं और साथ ही साथ यह मिडल ऑर्डर में काफी अच्छी बल्लेबाजी भी करते हैं.


4. वरुण चक्रवर्ती के पास 7 तरीके की वेरिएशन हैं जो चक्रवर्ती को कितना खास गेंदबाज बना देता है, चक्रवर्ती के जिन को समझ पाना काफी मुश्किल होता है.


5. चक्रवर्ती कभी फास्ट बॉलर बनना चाहते थे लेकिन चोट लगने के चलते स्पिनर गेंदबाज बन पाए थे.


6. वरुण चक्रवर्ती का सपना विकेट कीपिंग का भी था और यह स्कूल लेवल पर काफी अच्छी विकेटकीपिंग भी करते थे लेकिन बाद में यह है गेंदबाज बन गए और चोट लगने के चलते स्पिनिंग गेंदबाजी करने लगे.


7. वरुण चक्रवर्ती ने पढ़ाई के लिए कभी क्रिकेट को छोड़ दिया था लेकिन किस्मत इनको वापस क्रिकेट के मैदान पर ले आई.


देखना होगा कि आईपीएल 2019 में वरुण चक्रवर्ती किस तरह की का प्रदर्शन करके किंग्स इलेवन पंजाब की इस गोली को सही बताते हुए नजर आते हैं. वरुण चक्रवर्ती पर इस बार सभी की निगाह रहने वाली है.


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परिवार के मना करने और लोगों के हसनें पर भी झूलन गोस्वामी ने कभी हार नहीं मानी, पापा से बोला था मैं क्रिकेटर बनकर दिखाऊंगी पापा

एक वक्त था कि महिलाओं के क्रिकेट खेलने को लेकर लोग हंसी मजाक मानते थे. जहां महिला क्रिकेट खेलने की बात करती थी वहीं उनकी हंसी उड़ाई जाती थी. लेकिन वक्त बदला और महिला खिलाड़ी के एक से एक चेहरे निखरकर सामने आने लगे, अब जो लोग महिलाओं की हंसी लेते थे वही आज शाबाशी भी देने लगे और दे भी क्यों ना, महिलाएं लड़कर यह लड़ाई जो जीती हैं.

एक से एक रिकॉर्ड कायम करके महिला क्रिकेटर किसी पुरुष क्रिकेटर से कम नहीं है यदि अंतर है तो सिर्फ इतना कि महिला क्रिकेट में लोग कम रूचि लेते हैं. आज हम आपको महिला खिलाड़ी झूलन गोस्वामी का परिचय देंगे जिसे जानकर आपकी रूचि महिला क्रिकेट की तरफ जरूर बढ़े


jhulan goswami biography | क्रिकेटर झूलन गोस्वामी की जीवनी


झूलन गोस्वामी के ऐसे 10 तथ्य जिन्हें जानकर आप अचंभित हो जाएंगे


1. आपको बता दें कि झूलन गोस्वामी का जन्म 25 नवंबर 1983 में पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में हुआ. झूलन गोस्वामी की हाइट 5 फुट 11 इंच है जो खुद में दर्शाती है कि यह किसी पुरुष खिलाड़ी से कम नहीं है.


2. झूलन गोस्वामी सितंबर 2007 में सुर्खियों में आई क्योंकि इन्हें विश्व की सबसे तेज गेंदबाज घोषित करते हुए आईसीसी रैंकिंग में महिला क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया.


3. झूलन गोस्वामी एक बेहतरीन गेंदबाज है इनकी गेंदबाजी की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा है जो विश्व महिला क्रिकेट में सर्वाधिक है. यही कारण है कि आईसीसी ने इन्हें विश्व की सबसे तेज महिला गेंदबाज घोषित किया.


4. झूलन सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली दूसरी महिला क्रिकेटर हैं इन्होंने 79 एकदिवसीय मैचों में 96 विकेट लिए हैं.




5.यहां तक पहुंचने में झूलन ने बहुत कड़ी मेहनत की क्योंकि इनके क्रिकेटर बनने में इनकी मां- बाप इनसे नाराज रहते थे एक बार तो ये क्रिकेट खेलकर रात में घर देरी से पहुंची थी तो इनकी मां ने इन्हें बाहर ही खड़े रखा.


6. आज वही झूलन गोस्वामी नदिया एक्सप्रेस के नाम से जाने जाती हैं. बता दें कि झूलन ने अपना पहला टेस्ट मैच लखनऊ में इंग्लैंड की टीम के विरुद्ध 2002 में खेला था तब वह केवल 18 साल की थी.


7. उन्होंने 2007 तक 8 टेस्ट मैच खेले जिसमें 33 विकेट हासिल किए झूलन कभी भी विकेट लेने में पीछे नहीं रही. इस लीसेस्टर में हुई एक सीरीज के मैच में झूलन ने 78 रन देकर 10 विकेट लिए.


8. झूलन कहती हैं कि ज्यादातर लोग नहीं जानते कि “महिलाएं भी क्रिकेट खेलती है लेकिन मीडिया के कवरेज के बाद भारत में महिला क्रिकेट को भी जाना गया."




9. झूलन को 2006 में मुंबई के कैस्ट्रोल की तरफ से स्पेशल अवॉर्ड भी दिया गया.


10. शुरूआत में इन्होनं अपनी प्रैक्टिस लड़को के साथ की थी. वो इनकी बॉलिग करने पर हंसते थे जो इन्हें बिल्कुल भी पसमद नहीं था लेकिन हार ना मानते हुए मेहनत करके आज ये दुनिया की सबसे बेहरतीन बल्लेबाजी करने वाली महिला खिलाड़ी बनी गई.


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इंडियन क्रिकेट टीम का ऐसा खिलाड़ी जो बारहवीं पढ़ने के बाद मजदूरी करते-करते बना क्रिकेटर, दो वक़्त की रोटी खाने के लिए भी कभी पैसे नहीं बचे थे


परिवार के मना करने पर और लोगों के हसनें पर भी झूलन गोस्वामी ने हार नहीं मानी और कर दिखाया यदि कुछ करने का जज्बा हो तो लोगों क्या कहते और आपके बारें क्या सोचते है कोई भी फर्क नहीं पड़ता. आपके सपने केवल आपके ही हैं और आप ही उन सपनों को मंजिल दे सकते है.

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मुनाफ पटेल की जीवनी- भारत क्रिकेट टीम के लिए यह गर्व की बात है कि मुनाफ पटेल जैसा बेहतरीन गेंदबाज टीम में शामिल रहा और सन्यास लेने से पहले इंडियन टीम के लिए अपना योगदान देता रहा है. सन्यास लेने से पहले मुनाफ पटेल ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 15 सालों में 13 टेस्ट और 70 वनडे इंटरनेशनल मैच इंडिया के लिए खेले थे.


आपको बता दें कि मुनाफ पटेल गुजरात के रहने वाले हैं. एक छोटे से गांव इखार में टाइल के डिब्बों की पैंकिग का काम वह करते थे. 8 घंटे काम करने के बाद उनको 35 रुपये मिलता था. विश्वास करना थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन यह सच है कि मुनाफ पटेल जो भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक थे, जिन्होंने भारत को कई बार जीत हासिल करवाने में मदद की थी वह कभी मजदूरी का काम करते थे.




मुनाफ पटेल की जीवनी | Munaf Patel Biography in Hindi


इससे आप समझ सकते हैं कि मुश्किलों से भरा सफर उन्होंने कैसे तय किया होगा. एक इंटरव्यू के दौरान मुनाफ पटेल ने स्वीकार किया था कि उनके जीवन में इतना दुख था कि उनको झेलने की आदत हो गई थी. पैसे ना होने की वजह से वह मजदूरी का काम करते थे.

उनके घर में सिर्फ उनके पिता ही कमाने वाले थे. जिसकी वजह से उनको भी अपना कदम घर से बाहर निकालना पड़ा. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि आज वह जो भी है वह सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट के बदौलत हैं.




रास्ते में कई कांटे बिछे थे इसके बावजूद मुनाफ पटेल ने कभी हार नहीं मानी थी. इन्होनें साल 2006 में इंटरनेशनल डेब्यू किया था. आईपीएल में पहले ‘गुजरात लायन्स’ और फिर ‘मुंबई इंडियन्स’ के लिए खेलने वाले मुनाफ अब आगमी टी-10 लीग का हिस्सा होंगे. जहां पर वह राजपूत टीम की ओर से खेलेंगे.




मुश्किलों से ना हारने वाले मुनाफ पटेल भारत को साल 2011 में वर्ल्डकप दिलवाने में सहयोगी बने थे क्योंकि इस विश्वकप में मुनाफ पटेल ने 11 विकेट लिए थे. बता दें उस वक्त मुनाफ पटेल तीसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थेे. लेकिन अब मुनाफ पटेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायरमेंट ले ली है.


उन्होंने कहा, ‘मुझे किसी बात का मलाल नहीं.मैं जिन भी क्रिकेटरों के साथ खेला, वो सब रिटायर हो चुके हैं. बस धोनी बचे हैं. इसलिए अब कोई दुख नहीं. सबका टाइम खत्म हो चुका है, गम तब होता जब बाकी खेल रहे होते और मैं रिटायर होता. मेरा मन आज भी नहीं मान रहा कि मैं क्रिकेट छोड़ूं, क्योंकि इसके अलावा मुझे कुछ आता भी नहीं है.बस क्रिकेट ही समझ आता है.


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मुनाफ पटेल को देखकर तो ऐसा लगता है कि हमें कभी भी किसी भी तरीके के मुसीबतों से हार नहीं मानी चाहिए. ना हार मानने वाले व्यक्ति एक ऐसे योद्धा होते हैं जो अपने जीवन की एक नई कहानी लिखते हैं. आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा. हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं.

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